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अपा जी की चतुराई - Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Bedtime Moral Stories | Kahaniya

अपा जी की चतुराई - Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Bedtime Moral Stories | Kahaniya

अपा जी की चतुराई - Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Bedtime Moral Stories | Kahaniya

अप्पा जी के चतुराई की  कहानी विजयनगर के राजा कृष्ण देव राय के  पास अप्पाजी नाम एक बहुत ही होशियार  प्रधान था अप्पा जी की होशियारी की बात दिल्ली के  बादशाह तक पहुंच गई थी एक दिन बादशाह को उसकी होशियारी की परक  करने की इच्छा  हुई बादशाह ने हूबहू जिंदा आदमी जैसी  दिखने वाली तीन मूर्तियां राजा कृष्ण देव के दरबार भेज दी तीनों मूर्तियां बिल्कुल  एक जैसी थी उन्हें अलग से पहचानना नामुमकिन  इन मूर्तियों के साथ बादशाह ने ऐसा संदेश  भेजा कि इन मूर्तियों की उत्तम मध्यम कनिष्ठ ऐसी श्रेणी लगाकर दिखाएं यदि आप यह कर सके तो ही हम यह  मानेंगे कि राजा कृष्ण देव के पास राजनयिक एवं चतुर लोग  हैं एक ही धातु से बनी बिल्कुल एक जै जैसी दिखने वाली ऐसी यह मूर्तियां दरबार में  लोगों के सामने रखी गई कोई भी यह ना समझ पा रहा था कि उनकी  श्रेणी क्या होगी वह कैसे लगाई जाए अब राजा पूरी तरह से अप्पा जी के  निर्णय पर निर्भर था अप्पा जी ने मूर्तियां देखकर कहा कि वह अपना निर्णय  अगले दिन देगा राजा ने दूसरे दिन दरबार में जाते ही उससे उसका निर्णय  पूछा अप्पा जी एक मूर्ति के पास गया और  उसने कहा मैंने बारीकी से निरीक्षण किया  और मेरे ध्यान में आया कि हर मूर्ति के  कान में एक छेद है फिर मैंने इस मूर्ति के  कान के छेद से एक पतली तार अंदर डाली वह    तार मुंह से बाहर निकली यह मूर्ति कनिष्ठ  श्रेणी की है यह कहते हुए अप्पा जीी दूसरी मूर्ति के  पास गया और उसने कहा इस मूर्ति के एक कान के छेद से जब मैंने तार अंदर डाली तो वह  दूसरे कान से बाहर निकली इसलिए यह मूर्ति मध्यम श्रेणी की है और अंत में आखिरी  मूर्ति के पास जाकर उसने कहा जब मैंने इस मूर्ति के कान से तार डाली तो वह पेट में  चली गई इसलिए यह मूर्ति श्रेष्ठ है राजा ने कहा मैं कुछ समझा नहीं तुम्हें  इन तीनों का दर्जा भला कैसे पता चला तो  अप्पा जी ने कहा बहुत आसान है महाराज यह  तीन मूर्तियां व्यक्ति निर्देशक है जिसके पेट में तार रह गई वह मूर्ति सर्वश्रेष्ठ श्रेणी के चरित्र के आदमी जैसी है अतः यह मूर्ति श्रेष्ठ दर्जे की है क्योंकि इसको  बताई हुई बात फिर बाहर नहीं आती इसे बताई हुई बातें यह लोगों को नहीं बताती अपने  पास ही रखती  फिर उसने कहा जिसके कान से तार बाहर निकली  वह मूर्ति किसी सामान्य वृद्धि के मामूली आदमी समान है इसलिए वह मध्यम दर्जे की है  क्योंकि बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देने वाली व्यक्ति दूसरे ने बताई  हुई कोई भी बात गंभीरता से नहीं      लेती आखिर में अप्पा जी ने कहा जिस मूर्ति  के मुंह से तार बाहर निकली वह मूर्ति सुनी    हुई हर बात को सभी लोगों में बताते जाने  वाली व्यक्ति समान है इसीलिए वह कनिष्ठ श्रेणी की है उत्तर सुनते हुए राजा अप्पा  जी की बुद्धि और चतुराई से बहुत खुश हुआ उसने बड़ी खुशी के साथ बादशाह को अपना  निर्णय बता दिया

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