रहस्मय दर्पण - Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Bedtime Moral Stories | Kahaniya
रहस्मय दर्पण - Hindi Kahani | Moral Stories | Bedtime Stories | Bedtime Moral Stories | Kahaniya
रहस्यमय दर्पण एक गांव में एक बड़ा ही होशियार युवा रहता था वह बहुत अमीर भी था उसे विशेष दुर्लभ और बहुत महंगी चीजों का संग्रह करने का बड़ा ही शौक था उसे सबसे वे चीजें ज्यादा पसंद थी जो उसकी जिज्ञासा बढ़ाती थी फिर वह ऐसे ही चीजें खोजा करता था और अपने संग्रह में रखता था एक बार उसने एक बहुत ही पुराना दर्पण देखा वह दर्पण एक रहस्यमय घर में रहने वाले बहुत ही बूढ़े आदमी का था इस लड़के ने वह दर्पण खरीदने का निश्चय किया उसके लिए बूढ़े ने जो कीमत मांगी वह देकर उसने वह दर्पण खरीद लिया फिर उसने वह दर्पण अपने घर लाया दर्पण को ठीक जगह पर रखते हुए वह युवा अपना प्रतिबिंब उस दर्पण में देखने के लिए दर्पण के सामने खड़ा हो गया देखा तो क्या उसे उसका चेहरा बड़ा ही दुखी दिखाई दे रहा था फिर उसने अपना चेहरा जानबूझकर मुस्कुराता रखा आंखें बड़ी की जबान बाहर निकाली कई प्रकार के मजेदार चेहरे बनाए और देखे वह चाहता था कि उसका चेहरा मुस्कुराता दिखे और उसके लिए उसने बहुत प्रयास किए लेकिन नहीं कुछ भी करने पर उसका चेहरा दुखी ही दिखाई दे रहा था वह लड़का फिर मिठाई की दुकान में मिठाई खरीदने गया मनचाही मिठाई खरीदते हुए बड़ी खुशी से वह अपने घर वापस आ गया उसे भरोसा था कि अब उसका चेहरा दर्पण में जरूर ही हंसता हुआ खुश दिखेगा लेकिन नहीं वह फिर एक बार दर्पण के सामने खड़ा हो गया अरे अब भी उसका चेहरा दुखी वह फिर एक बार बाजार चला गया और अपनी पसंद की कई चीजें ले आया लेकिन फिर भी उस दर्पण में उसका चेहरा दुखी दिखाई दे रहा था अब वह युवा निराश हो गया अरे बाप रे यह कितना भयंकर दर्पण है मैंने ऐसा बिगड़ा हुआ बेकार दर्पण पहली बार देखा इसमें सच्चा प्रतिबिंब दिखाई ही नहीं देता यह कहते हुए उसने वह दर्पण घर के एक कोने में दूर रख दिया कुछ देर बाद वह किसी काम से घर से बाहर निकला रास्ते में उसे एक छोटा सा बच्चा जोर से रोता नजर आया बच्चा अकेला ही था आसपास उसके साथ कोई भी नहीं था यह देख उस अमीर युवा से रहा नहीं गया वह उसकी सहायता करने हेतु उसके पास गया तब उसे प पता चला कि वह बच्चा खो गया था उसे उसके माता-पिता मिल नहीं रहे थे फिर वह उस बच्चे को लेकर उसके माता-पिता को खोजने निकल पड़ा बच्चा तो बस रोए ही जा रहा था इसलिए युवा ने उसके लिए बहुत सारी खाने की मजेदार चीजें और खिलौने खरीद लिए और फिर एक बार वह उसे लेकर उसके माता-पिता को खोजने निकल पड़ा बहुत दूर तक चलने पर उसे उस लड़के के माता-पिता मिल गए वे दोनों बेचारे बहुत भयभीत होकर चिंता करते हुए अपने बच्चे को खोज रहे थे बच्चे को देखते ही वे बहुत खुश हो गए युवा को दुआएं देने लगे युवा बस मुस्कुराया और वहां से घर के लिए निकल पड़ा घर आते ही उसने क्या देखा जिस कोने में उसने वह दर्पण रखा था उस कोने में उसे चमकती हुई रोशनी दिखाई दी दर्पण से इतनी रोशनी क्यों निकल रही है यह देखने के लिए वह दर्पण के पास गया दर्पण में देखा तो क्या दर्पण भी चमक रहा था और उसके अपने चेहरे से भी एक हल्की सी रोशनी निकल रही थी अपना चमकता और उजला हुआ चेहरा देख युवा को बहुत खुशी हुई अब उसे उस दर्पण का राज पूरी तरह से समझ में आ गया वह दर्पण केवल औरों से अच्छा व्यवहार करने से मिलने वाला सच्चा आनंद ही दिखाने वाला दर्पण था अब उसे यह एहसास हो गया कि महंगी चीजों की तुलना में दुनिया में ऐसी कई चीजें हैं जो ज्यादा कीमती हैं उसने उस बच्चे की सहायता करने का सत्कर्म किया था इसलिए दर्पण अब उसे उसके चेहरे पर सात्विक सच्चा और शाश्वत आनंद दिखा रहा था तब से वह युवा रोज सुबह उस दर्पण में अपना चेहरा देखता और रोज से अपना चेहरा खुश नजर आता क्योंकि अपना चेहरा रोज ही खुश दिखे इसके लिए क्या करना चाहिए यह अब उसे भली भाति समझ में आ गया था

0 Comments: